अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद द्वारा अशोक सिंहल जन्म शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। जानें श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन, अशोक सिंहल जी के जीवन के अनसुने प्रसंगों और चंपत राय व सूर्यप्रताप शाही के वक्तव्यों के बारे में।
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, अयोध्या
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) अवध प्रांत द्वारा अयोध्या में श्रद्धेय अशोक सिंहल जी के जन्म शताब्दी समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने अशोक सिंहल जी के जीवन, उनके संघर्षों और सनातन धर्म व राष्ट्र रक्षा में उनके योगदान को याद करते हुए उनके सपनों को साकार करने का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन के दौरान जब भी निराशा के बादल छाते थे, अशोक सिंहल जी के प्रवेश मात्र से ही हिंदू समाज में एक नया उत्साह और उमंग भर जाती थी, जिससे समाज एकजुट होकर लक्ष्य प्राप्ति की ओर आगे बढ़ता था। मेटलर्जी साइंस की पढ़ाई करने के बाद बचपन के एक सपने ने उनके पूरे जीवन का मार्ग बदल दिया और वे ईश्वर द्वारा दिए गए राष्ट्र सेवा के कार्य में पूरी निष्ठा से जुट गए।
2026 से 2027 तक वर्ष भर आयोजित होंगे विशेष कार्यक्रम
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए विहिप के क्षेत्रीय संगठन मंत्री गजेंद्र सिंह ने बताया कि अशोक सिंहल जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर 2 सितंबर 2026 से सितंबर 2027 तक पूरे वर्ष विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
संत सम्मेलन व गो-सेवा: प्रत्येक प्रांत में संत सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, गो-सेवा और कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले के एक ब्लॉक को 'गो-कृषि आधारित ब्लॉक' बनाया जाएगा।
वेद विद्यालयों की स्थापना: अशोक सिंहल जी द्वारा शुरू किए गए वेद प्रचार के कार्य को आगे बढ़ाते हुए नए वेद विद्यालयों की स्थापना की जाएगी।
विहिप का सदस्यता अभियान: अवध प्रांत में लगभग चार लाख लोगों को विश्व हिंदू परिषद से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में रामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास जी ने अशोक सिंहल जी के साथ बिताए संस्मरणों को साझा किया। अयोध्या के महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने भी अशोक जी के कार्यों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उदासीन अखाड़े के पूज्य भरत दास जी, विहिप के पुरुषोत्तम नारायण सिंह, हरिशंकर, सुरेंद्र सिंह, धीरेश्वर वर्मा, अभिषेक, संघ चालक डॉ. विक्रमा प्रसाद पांडेय तथा देवेंद्र जी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सह प्रांत मंत्री विवेक सिंह ने किया। इससे पूर्व मोहन शास्त्री ने अवधी गीत प्रस्तुत किया, जबकि राजेंद्र सिंह पंकज व शिवदास जी ने अशोक सिंहल जी के साथ बिताए पलों के संस्मरण सुनाए।
विद्यार्थियों की राजनीति में हो सक्रियता' : सूर्यप्रताप शाही
समारोह के मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने अशोक सिंहल जी से जुड़ी यादों को साझा करते हुए कहा कि उन्हें छात्र जीवन से ही अशोक जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
विद्यार्थी परिषद की भूमिका: उन्होंने बताया कि विद्यार्थी परिषद में उन्हें लगभग 28 वर्षों तक अशोक जी का सानिध्य मिला। अशोक जी का हमेशा चिंतन रहता था कि विद्यार्थी किस प्रकार राष्ट्रीय भावना के साथ देश की राजनीति में आगे बढ़ सकें। राम मंदिर आंदोलन की मजबूत नींव रखने में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अशोक जी की प्रेरणा से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संतों के प्रति अटूट श्रद्धा: सूर्यप्रताप शाही ने कहा कि अशोक जी संतों का सम्मान जमीन पर लेटकर और शास्त्रीय विधि से साष्टांग दंडवत करके करते थे। आज अयोध्या में भगवान श्रीराम का जो भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, वह उनके दृढ संकल्प का ही परिणाम है।
विकसित भारत का संकल्प: उन्होंने कहा कि हमारी सनातन परंपरा हथियारों से नहीं, बल्कि सिद्धांतों, आचरण और व्यवहार से जीतने की रही है। इसी आचरण को अपनाकर हमें 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करना है।
कांग्रेस नेता की प्रेरणा से शुरू हुआ था जन्मभूमि आंदोलन : चंपत राय
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक तथ्य को उजागर किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के मुख्य प्रेरणा स्रोत एक राष्ट्रभक्त कांग्रेस नेता दाऊ दयाल खन्ना थे। मुरादाबाद में 1983 के एक हिंदू सम्मेलन में खन्ना जी ने आह्वान किया था कि "हिंदुओं अयोध्या, मथुरा, काशी को मुक्त कराओ।" इसके बाद अशोक जी ने राम जन्मभूमि आंदोलन की कमान अपने हाथों में ली। पांच बार के कांग्रेस विधायक और चंद्रभान गुप्ता की कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री रहे अत्यंत ईमानदार नेता दाऊ दयाल खन्ना जी ने इस आंदोलन के लिए अपनी पार्टी और विधायक पद से त्यागपत्र दे दिया था।
चंपत राय ने अशोक सिंहल जी के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग सुनाए
माता का तिलक और राष्ट्र समर्पण: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से मेटलर्जी की पढ़ाई के दौरान बीमार पिता की सेवा के स्थान पर जब उन्होंने संघ कार्य को चुना, तो उनकी माता जी ने चाकू से अपना अंगूठा चीरकर उनके माथे पर तिलक लगाया और उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
गोरक्षा का जुनून: कानपुर में संघ प्रचारक रहने के दौरान जब उन्हें सूचना मिली कि रेलगाड़ी से गायें ले जाई जा रही हैं, तो वे साथियों के साथ गए और डिब्बों के ताले तोड़कर गायों को मुक्त कराया।
विराट हिंदू समाज और पंजाब शांति यात्रा: तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम में हुए धर्मांतरण के बाद उन्होंने 'विराट हिंदू समाज' का गठन कर विशाल शक्ति प्रदर्शन किया, जिसमें कश्मीर के महाराजा करण सिंह भी शामिल हुए। पंजाब में शांति स्थापित करने के लिए उन्होंने 300-400 संतों को एकजुट कर हरिद्वार से अमृतसर अकाल तख्त तक यात्रा निकाली।
सामाजिक समरसता: उन्होंने संतों की सभा में डोमराजा को आमंत्रित किया, संत रविदास की वाणी का ग्रंथ छपवाकर यात्रा निकाली तथा बौद्ध व सनातन परंपरा को एक मंच पर लाने के लिए दलाई लामा और कांची कामकोटि शंकराचार्य जी को एक साथ बैठाया। 1983 में स्वामी चिन्मयानंद जी द्वारा स्थापित विहिप में अशोक जी ने संतों की भागीदारी को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाया और 'धर्म संसद' का विचार दिया।
अशोक जी हमेशा सिखाते थे कि "सामाजिक जीवन में क्रोध मत करो, और यदि करो भी तो वह पानी पर चाकू से चीरने जैसा होना चाहिए जो एक ही क्षण में विलुप्त हो जाए।"
- चंपत राय, केंद्रीय उपाध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद





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