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| प्रेसवार्ता में जानकारी देते वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश चंद्र त्रिपाठी। |
प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, कानपुर
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चुनाव की सरगर्मी के बीच कानपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता और कानपुर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी ने अपने प्रतिद्वंदियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शनिवार को आयोजित एक प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर कुछ लोग उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने के लिए कानूनी साजिशें कर रहे हैं।
हाईकोर्ट से मिली क्लीन चिट, खारिज हुई याचिका
नरेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि उनके नामांकन को निरस्त कराने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक निराधार याचिका (रिट संख्या 2025) दाखिल की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक बाहरी व्यक्ति के माध्यम से उनके खिलाफ पुराने और बेबुनियाद मामलों को तूल देने की कोशिश की गई। हालांकि, माननीय उच्च न्यायालय और बार काउंसिल के चुनाव अधिकारी, दोनों ने इन आरोपों को बेबुनियाद मानते हुए खारिज कर दिया है।
अधिवक्ता हितों के लिए संघर्ष का इतिहास
प्रेसवार्ता के दौरान त्रिपाठी ने अपने पुराने संघर्षों को याद करते हुए बताया कि वर्ष 2009-10 का पुलिस-वकील टकराव हुआ था। महामंत्री रहते हुए उन्होंने वकीलों पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ 3 महीने लंबी ऐतिहासिक हड़ताल का नेतृत्व किया। इसकी गूँज लोकसभा तक सुनाई दी थी।
वर्ष 2022-23 का कार्यकाल अध्यक्ष रहते हुए तत्कालीन जिला जज के व्यवहार के विरोध में 29 दिनों तक न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया और मानहानि के मामलों का निडर होकर सामना किया।
मेरा भावी एजेंडा : हड़ताल पर पाबंदी के खिलाफ आंदोलन
नरेश चंद्र त्रिपाठी ने चुनाव जीतने के बाद अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने संकल्प लिया कि अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने (हड़ताल) पर लगी पाबंदियों के खिलाफ वे देशव्यापी आंदोलन करेंगे। अधिवक्ताओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी और सड़क की लड़ाई जारी रखेंगे।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा, मैं 37 वर्षों से वकालत के पेशे में हूँ। मैंने कभी हार नहीं मानी है। अधिवक्ताओं के सम्मान की यह लड़ाई मेरी अंतिम सांस तक जारी रहेगी। प्रेसवार्ता में नरेश मिश्रा एडवोकेट, सियाराम पाल एडवोकेट और शशिकांत तिवारी एडवोकेट सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे।

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