उत्तर मध्य रेलवे केंद्रीय चिकित्सालय, प्रयागराज में 74 वर्षीय महिला की पहली सफल कीमोथेरेपी के साथ चिकित्सा क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित हुआ। अब रेल कर्मियों को अस्पताल में ही मिलेगा कैंसर का इलाज।
उत्तर मध्य रेलवे के चिकित्सा इतिहास में बड़ी उपलब्धि, स्वास्थ्य सेवाओं में नए अध्याय की शुरुआत प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, प्रयागराज
उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के केंद्रीय चिकित्सालय ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चिकित्सालय के इतिहास में पहली बार कैंसर पीड़ित मरीज की सफल कीमोथेरेपी की गई है। पित्ताशय के कैंसर (एडवांस्ड कार्सिनोमा इन गॉलब्लैडर) से पीड़ित 74 वर्षीय महिला का इलाज अस्पताल में सफलतापूर्वक करने में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम कामयाब हुई है।
रेफरल के झंझट से मिली मुक्ति
अब तक उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के रेलवे कर्मचारियों व उनके परिजनों को कीमोथेरेपी जैसी जटिल प्रक्रियाओं के लिए अन्य निजी या सरकारी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता था। इससे न केवल मरीजों को भाग-दौड़ करनी पड़ती थी, बल्कि उपचार में भी देरी होने से जटिलताएं पैदा होती थीं। इस सुविधा के शुरू होने से अब रेल कर्मियों और उनके आश्रितों को एक ही छत के नीचे कैंसर का आधुनिक उपचार मिल सकेगा।
विशेषज्ञों की देखरेख में हुआ उपचार
यह जटिल प्रक्रिया चिकित्सा निदेशक डॉ. एसके हांडू के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस चिकित्सकीय अभियान में विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक संयुक्त टीम ने कार्य किया, जिसमें निम्न चिकित्सक शामिल रहे, उनके नाम नीचे दिए जा रहे हैं।
- डॉ. वैशाली सिंह : मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS), कैंटोनमेंट बोर्ड, प्रयागराज।
- डॉ. वीके पांडेय एवं डॉ. एसके पांडेय : वरिष्ठ चिकित्सक।
- डॉ. अनुराग यादव एवं डॉ. संजय कुमार : विशेषज्ञ चिकित्सक।
टीम के समन्वित प्रयासों और निरंतर निगरानी के कारण कीमोथेरेपी की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित रही। डॉक्टरों के अनुसार, वर्तमान में मरीज की स्थिति स्थिर और संतोषजनक है। उन्हें फॉलो-अप के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
रेलवे और कर्मचारियों को दोहरा लाभ
केंद्रीय चिकित्सालय में कीमोथेरेपी सुविधा प्रारंभ होने के दूरगामी लाभ होंगे। इसके साथ ही उत्तर मध्य रेलवे का केंद्रीय चिकित्सालय अब आधुनिक और आत्मनिर्भर स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभर रहा है
समय की बचत : मरीजों को अब अन्य शहरों या निजी केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने होंगे।
राजस्व की बचत : रेफरल केस कम होने से रेलवे के राजस्व में महत्वपूर्ण बचत होगी।
सुगम उपचार : बुजुर्ग और गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल परिसर में ही विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध होना राहतकारी है।

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