Big News From Lucknow : मान्यता के लिए निजी मेडिकल कॉलेज ने ऐसा कर डाला, बुलानी पड़ी पुलिस

मान्यता के लिए मजदूरों को बनाया मरीज, इलाज करने पर भड़के


एमसी सक्सेना मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल का मामला


पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आजाद कराया मजदूरों को





प्रारब्ध न्यूज ब्यूरो, लखनऊ


नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) से मान्यता हासिल करने के लिए लखनऊ के एमसी सक्सेना मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल ने 250 से ज्यादा मजदूरों को बंधक बना लिया। उन्हें बेड पर लिटाकर ग्लूकोज के लिए जैसे ही वीगो हाथ में लगाने का प्रयास स्वास्थ्य कर्मियों ने शुरू किया। सभी मजदूर भड़क उठे। हंगामा शुरू कर दिया। इसी दौरान एक मजदूर स्वास्थ्य कर्मचारियों को चकमा देकर वहां से भाग निकला। उसने पुलिस को सूचना देकर मामले का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने हॉस्पिटल के प्रशासनिक अधिकारी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।



ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ कॉलेज है। दुबग्गा में इससे संबद्ध डॉ. आरआर सिन्हा मेमोरियल हॉस्पिटल है। घटना मंगलवार की है। डाला (छोटा हाथी) में बड़ी संख्या में शहर के लेबर अड़डों से मजदूरों को लाया गया। अस्पताल के भीतर सभी को ले जाया गया। बाद भी सभी को अलग-अलग बेड में लेटने के लिए कहा गया। सभी मजदूर लेट गए। इसके बाद कर्मचारी ने कुछ मजदूरों को वीगो लगाने के लिए कहा। कुछ लोगों को इंजेक्शन लगाने के लिए कहा। 



भड़का मजदूरों का गुस्सा


मजदूरों का भड़क उठे। मजदूरों ने कहा कि हम यहां काम करने आए हैं। इलाज कराने नहीं आए हैं। यह सुनकर डॉक्टर-कर्मचारी भौचक रह गए। डॉक्टरों ने कहा कि ठीक है आप लोगों को तीन वक्त का भोजन मिलेगा। मुफ्त इलाज संग 500 रुपये मजदूरी भी दी जाएगी। बेवजह के इलाज से मजदूर घबरा गए। मजूदरों ने भागने की कोशिश की। तो कर्मचारियों ने मुख्य गेट बंद कर दिया। मजदूर बंधक बना लिए गए। 


इसी दौरान अंश नामका मजदूर करीब तीन घंटे की जद्दोजहद के बाद किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहा। उसने पुलिस को मामले की सूचना दी। ठाकुरगंज समेत कई थानों की पुलिस शाम चार बजे मौके पर पहुंची। हॉस्पिटल से मजदूरों को रिहा कराया। डिप्टी सीएमओ डॉ. एपी सिंह व डॉ. केडी मिश्रा भी अस्पताल पहुंचे। पूरी जानकारी जुटाई। अधिकारियों का कहना है कि मान्यता के लिए मरीजों की आवश्यकता होती है। इस मानक को पूरा करने के लिए ठेके पर अलग-अलग इलाकों के मजदूरों को लाया गया था। ताकि निरीक्षण पर आने वाली टीमों को भर्ती मरीज दिखाए जा सकें।

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