Prarabdh Dharm-Aadhyatm : आज का पंचांग एवं व्रत-त्योहार


दिनांक 07 मार्च 2021, दिन - रविवार


विक्रम संवत - 2077, शक संवत - 1942


 उत्तरायण अयन


 वसंत ऋतु, फाल्गुन मास  (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार - माघ)


कृष्ण पक्ष, नवमी तिथि शाम 04:47 बजे तक तत्पश्चात दशमी


मूल नक्षत्र रात्रि 08:59 बजे तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा


सिद्धि योग शाम 03:52 बजे तक तत्पश्चात व्यतिपात


राहुकाल - शाम 05:16 बजे से शाम 06:45 बजे तक


सूर्योदय - 06:55 बजे, सूर्यास्त - 18:44 बजे


दिशाशूल - पश्चिम दिशा में


व्रत : समर्थ रामदासजी नवमी


विशेष 


नवमी को लौकी खाना माना होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)


रविवार के दिन ब्रह्मचर्य पालन करे और तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)


रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)


रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)


स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।

              

व्यतिपात योग


07 मार्च 2021 रविवार को शाम 03:53 बजे से 08 मार्च, सोमवार को दोपहर 01:51 बजे तक व्यतीपात योग है।


व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायाम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका एक लाख गुना फल मिलता है।


वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।


व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्राणायाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।


पंचक


11 मार्च प्रात: 9.19 बजे से 16 मार्च प्रात: 4.45 बजे तक

7 अप्रैल दोपहर 3 बजे से 12 अप्रैल प्रात: 11.30 बजे तक


व्रत-त्योहार विवरण


विजया एकादशी : मंगलवार, 09 मार्च


प्रदोष व्रत : बुधवार, 10 मार्च


फाल्गुनी अमावस्या : शनिवार, 13 मार्च


आमलकी एकादशी : गुरुवार, 25 मार्च 


प्रदोष व्रत : शुक्रवार, 26 मार्च


फाल्गुन पूर्णिमा : रविवार 28 मार्च

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